मातृ मृत्यु दर: भारत ने बड़ी कमी की, पर चीन और ब्राज़ील से अब भी पीछे
मातृ मृत्यु दर (प्रति 1,00,000 जीवित जन्म), 2023
नाइजीरिया
993 प्रति 1,00,000 जीवित जन्म
पाकिस्तान
155 प्रति 1,00,000 जीवित जन्म
बांग्लादेश
115 प्रति 1,00,000 जीवित जन्म
भारत
80 प्रति 1,00,000 जीवित जन्म
ब्राज़ील
67 प्रति 1,00,000 जीवित जन्म
अमेरिका
17 प्रति 1,00,000 जीवित जन्म
चीन
16 प्रति 1,00,000 जीवित जन्म
WHO, यूनिसेफ़, UNFPA, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या प्रभाग के संयुक्त अनुमान (Maternal Mortality Estimation Inter-Agency Group) के अनुसार, भारत की मातृ मृत्यु दर 2000 में प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 362 से घटकर 2023 में 80 रह गई — यानी 23 साल में लगभग 78% की गिरावट, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज़ से एक वास्तविक और बड़ी उपलब्धि है। लेकिन इसी तुलना समूह में भारत अब भी चीन (16) और अमेरिका (17) से कहीं पीछे है, और ब्राज़ील (67) से भी थोड़ा पीछे। भारत आगे है सिर्फ़ अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसियों — बांग्लादेश (115) और पाकिस्तान (155) — तथा नाइजीरिया (993) से, जहां का आंकड़ा इस समूह में सबसे ज़्यादा है। ईमानदार तस्वीर यह भी है कि यह गिरावट सीधी रेखा में नहीं आई: वैश्विक आंकड़े 2021 में एक अस्थायी उछाल दिखाते हैं (155 तक), जो कोविड-19 महामारी के दौरान मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यवधान से जुड़ा माना जाता है, इससे पहले 2022-23 में यह फिर तेज़ी से घटा। एक सामान्य भारतीय परिवार के लिए इसका सीधा मतलब है कि प्रसव अब पहले से कहीं ज़्यादा सुरक्षित है, पर फिर भी लगभग हर 1,250 प्रसवों में से एक में मां की जान का खतरा बना रहता है — जो चीन या अमेरिका की किसी मां के मुकाबले लगभग पांच गुना ज़्यादा जोखिम है। यह आंकड़ा भारत के स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार (जैसे इसी साइट पर दर्ज एम्स नेटवर्क और मेडिकल कॉलेज सीटों में बढ़ोतरी) की असल कसौटी है — प्रगति वास्तविक है, पर लक्ष्य से दूरी भी उतनी ही वास्तविक।
स्रोत
- Maternal mortality ratio (modeled estimate, per 100,000 live births) — World Development IndicatorsWorld BankOfficial / primary source
- Maternal mortality (fact sheet, MMEIG estimates)World Health OrganizationOfficial / primary source