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2020 की वैश्विक मंदी में भारत की GDP: सबसे हल्की चोट नहीं, पर सबसे तेज़ वापसी

वास्तविक GDP वृद्धि दर, 2020 (कोविड-19 वैश्विक मंदी का पहला वर्ष)

चीन
+2.3%
अमेरिका
-2.1%
ब्राज़ील
-3.3%
जर्मनी
-4.1%
जापान
-4.3%
भारत
-5.8%
ब्रिटेन
-10.0%
जब कोविड-19 महामारी ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे गहरी वैश्विक मंदी को जन्म दिया, तो भारत की अर्थव्यवस्था इससे बची नहीं रही। विश्व बैंक के आंकड़े दिखाते हैं कि 2020 में भारत की वास्तविक GDP 5.8% सिकुड़ गई — यह अमेरिका (-2.1%), जर्मनी (-4.1%), जापान (-4.3%) और ब्राज़ील (-3.3%) से ज़्यादा गहरी गिरावट थी, हालांकि ब्रिटेन की 10.0% की गिरावट से कम। इस समूह में चीन इकलौती बड़ी अर्थव्यवस्था थी जो उस साल भी 2.3% की दर से बढ़ती रही। एक सामान्य भारतीय परिवार के लिए यह सिकुड़न सिर्फ़ राष्ट्रीय लेखा-जोखा की एक लाइन नहीं थी — यह दुनिया के सबसे सख्त लॉकडाउन के दौरान गई मज़दूरी और आय के रूप में सामने आई। लेकिन तस्वीर रिकवरी में पूरी तरह पलट गई: भारत 2021 में 9.7% और 2022 में 7.6% की दर से बढ़ा, जो इस समूह की किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे तेज़ वापसी में से एक थी। ईमानदार शुरुआती बिंदु यही है कि संकट के असल साल में भारत की गिरावट इस समूह के भीतर सबसे हल्के सिरे पर नहीं, बल्कि ज़्यादा गहरे सिरे पर थी — 'सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था' वाली छवि 2020 के इस विशेष कट पर लागू नहीं होती, भले ही रिकवरी के सालों में यह सच साबित हुई। एक सामान्य कामगार परिवार के लिए, यह फ़र्क बताता है कि आर्थिक झटके और उनसे उबरने की रफ़्तार दोनों ही असल जिंदगी पर असर डालते हैं — और दोनों को साथ देखना ज़रूरी है, न कि सिर्फ़ रिकवरी के आंकड़े को।

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2020 की वैश्विक मंदी में भारत की GDP: सबसे हल्की चोट नहीं, पर सबसे तेज़ वापसी