माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर एक दशक में 17.06% से घटकर 14.1% हुई — लेकिन स्कूल शुरू करने वाले सिर्फ़ 47% छात्र ही कक्षा 12 तक पहुंच पाते हैं
प्रकाशित: 16 सित॰ 2026
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माध्यमिक स्तर (कक्षा IX-X) ड्रॉपआउट दर
स्कूल में दाखिले से कक्षा 12 तक प्रतिधारण (2024-25)
2014-15 में, कक्षा 9 तक पहुंचने वाले लगभग हर 6 में से 1 किशोर कक्षा 10 पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ देता था। यह हिस्सा तब से वाकई घटा है। लेकिन पूरी स्कूली यात्रा पर नज़र डालें तो एक कठिन सच्चाई सामने आती है: आज स्कूल शुरू करने वाले हर 100 बच्चों में से सिर्फ़ 47 ही कक्षा 12 पूरी करने तक टिक पाते हैं — ज़्यादातर नुकसान कक्षा 10 के बाद होता है, उससे पहले नहीं।
वह मुख्य आंकड़ा जो वाकई सुधरा है
जनवरी 2018 में लोकसभा में दिए गए एक लिखित जवाब में, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भारत की 2014-15 की ड्रॉपआउट दर प्राथमिक स्तर पर 4.13% और माध्यमिक स्तर (कक्षा IX-X) पर 17.06% बताई थी — यानी उस साल कक्षा 9 तक पहुंचने वाले लगभग हर 6 में से 1 छात्र कक्षा 10 तक नहीं पहुंच पाया। 2023-24 तक, UDISE+ आंकड़े जारी करते हुए शिक्षा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति ने माध्यमिक ड्रॉपआउट दर 14.1% बताई (प्राथमिक घटकर 1.9% और उच्च प्राथमिक 5.2% हो गया)। किसी एक किशोर के लिए, यह गिरावट एक असली, मापने-योग्य फ़र्क़ दिखाती है: खेत में, किसी कार्यशाला में, या जल्दी शादी में जाने के बजाय क्लासरूम में एक और साल — ठीक उस उम्र में जब यह साल भविष्य की कमाई क्षमता के लिए सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
असली गिरावट वास्तव में कहां होती है
अधिक बारीक UDISE+ 2024-25 डेटासेट — जो अब NEP 2020 के तहत सरकार के नए चरण-वर्गीकरण का इस्तेमाल करता है — हर चरण में ड्रॉपआउट को और घटता दिखाता है (प्रारंभिक 2.3%, मध्य 3.5%, माध्यमिक कक्षा 9-12 मिलाकर 8.2%, या पुराने तरीके से सिर्फ़ कक्षा 9-10 नापें तो 11.5%)। लेकिन इसी रिलीज़ के प्रतिधारण (रिटेंशन) आंकड़े एक ज़्यादा कड़वी कहानी बताते हैं: मध्य विद्यालय पूरा करने वाले 86.6% छात्र माध्यमिक स्तर पर पहुंच तो जाते हैं, लेकिन व्यवस्था में कभी दाखिला लेने वाले कुल छात्रों में से सिर्फ़ 47.2% ही कक्षा 12 तक नामांकित रह पाते हैं। दूसरे शब्दों में, भारत की स्कूली शृंखला में ज़्यादातर नुकसान कक्षा 10 के बाद होता है, दाखिले के समय नहीं — यह वह पैटर्न है जिसे चरण-दर-चरण मापी गई मुख्य ड्रॉपआउट प्रतिशत संख्याएं कम करके दिखा सकती हैं। यह अंतर राज्यवार भी बहुत असमान है: पश्चिम बंगाल की माध्यमिक ड्रॉपआउट दर (20.0%) चंडीगढ़ (2.0%) से दस गुना ज़्यादा है, और कर्नाटक, असम, अरुणाचल प्रदेश व गुजरात सभी में माध्यमिक ड्रॉपआउट 16% से ऊपर दर्ज हुआ, जबकि केरल, झारखंड और उत्तराखंड में यह 5% से भी कम है।
यह सुधार एक चेतावनी-चिह्न के साथ क्यों आता है
दो बातें इसे सीधी अच्छी-ख़बर मानने से रोकती हैं। पहली, UDISE+ ने हाल के वर्षों में अपनी गिनती पद्धति बदल दी — स्कूल-रिपोर्टेड फ्लो-रेट गणना से व्यक्तिगत छात्र-आईडी ट्रैकिंग की ओर — यह बदलाव हाल के वर्षों को 2014-15 की आधार-रेखा से पूरी तरह तुलनीय नहीं बनाता, इसलिए दिखने वाले सुधार का कुछ हिस्सा असली व्यवहारगत बदलाव के बजाय मापन का फ़र्क़ भी हो सकता है। दूसरी, दरें घटने के बावजूद नुकसान का पूर्ण आंकड़ा अब भी बड़ा है: सिर्फ़ 2023-24 से 2024-25 के बीच 68.16 लाख बच्चे ड्रॉपआउट के रूप में दर्ज हुए (इनमें से 42.74 लाख माध्यमिक स्तर पर), और 2017-18 से 2024-25 के बीच कुल स्कूल नामांकन ख़ुद लगभग 2 करोड़ घट गया — यह सिकुड़ता आधार प्रतिशत-आधारित ड्रॉपआउट आंकड़ों को बेहतर दिखा सकता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड सहित कई बड़े राज्यों ने 2024-25 में प्राथमिक स्तर पर शाब्दिक रूप से 0% ड्रॉपआउट दर दर्ज की, जिसे स्वतंत्र विश्लेषकों ने इतने बड़े और प्रशासनिक रूप से विविध राज्यों के लिए असंभव-सा बताया है; ख़ुद शिक्षा मंत्रालय को एक सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा, जब ओडिशा सरकार ने विधानसभा में राज्य के लिए दर्ज UDISE+ के 27.3% ड्रॉपआउट आंकड़े को चुनौती दी — इस घटना ने सिर्फ़ मुख्य आंकड़े को ही नहीं, बल्कि अंतर्निहित स्कूल-स्तरीय आंकड़ा-संग्रह की विश्वसनीयता को भी सवालों के घेरे में ला दिया।
स्रोत
- India's school education system serves 24.8 crore students across 14.72 lakh schoolsPress Information Bureau, Government of IndiaOfficial / primary source
- Primary level dropout rate in India was 4.13% in 2014-15: Prakash JavadekarBusiness StandardReputable media
- UDISE+ may be underestimating dropout rates; here's whyCareers360Reputable media
- What UDISE+ 2024-25 Tells About India's Dropout RateiDream EducationSecondary source
आख़िरी बार सत्यापित: 16 सित॰ 2026
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