रायमिश्रित राय
1 अरब कनेक्शन एक असली आंकड़ा है। वह अंतर भी उतना ही असली है जिसे यह नहीं पाटता
इस पर एक संपादकीय राय: भारत में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 1 अरब के पार
एक ऐसे देश में जहां एक दशक पहले मुश्किल से 13 करोड़ ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर थे, वहां 1 अरब कनेक्शन का आंकड़ा पार करना एक ऐसी इंफ्रास्ट्रक्चर कहानी है जिसके वैश्विक स्तर पर कम ही उदाहरण हैं — इसका ज़्यादातर हिस्सा फिक्स्ड-लाइन केबल के बजाय मोबाइल नेटवर्क पर बना है, जो अपने आप में एक तरह की छलांग है। इसने वाकई बदल दिया कि क्या संभव है: UPI, DBT, टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन शिक्षा — यह सब उसी ब्रॉडबैंड परत को मानकर चलते हैं जिसे यह उपलब्धि दर्शाती है। 1 अरब कनेक्शन का मतलब अपने आप में 1 अरब लोगों का सार्थक रूप से ऑनलाइन होना नहीं है। कनेक्शन की गिनती यह नहीं बताती कि क्या एक घर में पांच लोग एक ही फ़ोन साझा करते हैं, क्या सबसे कम आय वर्ग के लिए डेटा अब भी महंगा है, या क्या डिजिटल साक्षरता डिजिटल पहुंच के साथ तालमेल बिठा पा रही है — ऐसे अंतर जिन्हें सरकार का अपना नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन 2.0, जो खासतौर पर गांवों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए शुरू हुआ, परोक्ष रूप से स्वीकार करता है। दोनों बातें एक साथ सच हैं: भारत ने एक दशक में वाकई विश्व-स्तरीय टेलीकॉम पहुंच बनाई, और पहुंच पूर्ण डिजिटल समावेशन के बराबर नहीं है। मिशन का अगला चरण साफ़ तौर पर उसी अंतर को पाटने के लिए है — जो अपने आप में यह स्वीकृति है कि पहला 1 अरब कनेक्शन इसे पूरी तरह पाट नहीं पाया।
चर्चा (1)
चर्चा में शामिल होने के लिए Google से साइन इन करें।
Abhishek Tyagi15 सित॰ 2026
It makes sense but we still need a lot of changes to stand at par with the world.